Posts

Showing posts from 2016

युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

Image
युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

महिला सशक्तिकरण के पुरोधा : बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर

   महिला सशक्तिकरण के पुरोधा : बाबासाहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर      बाबासाहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टि से दलितों के प्रति समर्पित नेता थे। आजादी के पूर्व एवं पश्चात् वह धर्म के सुधारवादी- आलोचक और राजनीति में एक निश्चित दृष्टिकोण अपनाने वाले व्यक्ति थे। संविधान के महान निर्माता, गम्भीर विद्वान, और जिज्ञासु भी थे। इन सबसे अधिक वह अनेक स्तरों पर मानव मुक्ति के लिए एक सशक्त योद्धा थे। वैसे वह मामूली परिवार में जन्मे थे, पर विधि निर्माण के क्षेत्र में वह सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्ति बन गये। संविधान और विधिक क्रांति को समझने वाले लोग, उन्हें सामाजिक न्याय का मसीहा और सामाजिक दासता का कट्टर शत्रु के रूप में स्मरण करते है।     भारतीय इतिहास में अम्बेडकर ही एकमात्र पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इस देश की स्त्रियों की वस्तुगत स्थिति और उनके शोषण के आधारों को इस तरह से समझा जिस तरह से किसी ने नहीं समझा था। यह भारतीय समाज के उनके गहन अध्ययन और उनकी पैनी नज़र का ही नतीजा था कि उन्होंने स्त्री समस्या और स्त्री-पुरुष संबंधों कीअसमानता क...

महिलाओं के लिए शिक्षण संस्थानों के तुगलकी फरमान

आज 21वीं सदी में भी सदियों पुरानी सोच को हावी करने की कोशिशे की जा रही है। वो भी भारत जैसे देश में जो बहुत हद तक पश्चिमी सभ्यता को अपना चुका है और बड़ी तेज़ी से इस ओर अग्रसर है। एक खुले और लोकतान्त्रिक समाज में कोइ भी अतार्किक सोच और नियम कानून हमे रुढ़िवादी तो बनाते ही है साथ ही साथ हमारे विकास को भी प्रभावित करते है। और जब समाज को आगे बढ़ाने का  जिम्मा सम्भालने वाले शिक्षण संस्थानों में खाफ पंचायतों की तरह नियम बनने लगे तो तब समाज के विकास की दिशा पर प्रश्नचिंह जरुर लगता है। इन नियमों की बानगी देखिये- लड़कियों को लड़कों से दूरी बना कर रखनी है  और वे एक-दूसरे को छू नही सकते, बालों का जुड़ा बड़ा भी नही होना चाहिए और ज्यादा नीचे भी नही, काजल, रंगीन लिपस्टिक का प्रयोग नही होना चाहिए, शर्ट पर बटन होने चाहिए इसमे रंगीन बटन भी चल सकते है, बाल खुले नही होने चाहिए..... ये तुगलकी फरमान खाप पंचायतों के नही है बल्कि अपने आप को खुला समाज कहने और दूसरे धर्मों से अपने धर्म को उदार और महिला हितेषी कहने वाले कैथोलिक धर्म के एक विद्यालय सेंट अलॉयसीस प्री- यूनिवर्सिटी कॉलेज, मंगलुरु के मेनेजमेंट ने अ...

पहली दस्तक

आज से "नज़र" की शुरुआत कर रही हूँ। आज पहली बार यहाँ दस्तक दी है तो समझ नही आ रहा क्या लिखूं। वो हाथ आज चल ही नही रहा जो खबर की एक लाइन पढने पर खुद-ब-खुद चलने लग जाता था। कागज पर कुछ शब्द जड़ देता था। ये नज़र मेरे नजरिये को दिखायेगा। जो समय के साथ ज्यादा बदलाव का साक्षी बनेगा।