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Showing posts from May, 2020

युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

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युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

कोरोना और भविष्य का डर

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30 मई 2020-1 डायरी लिखना शुरू कर रही हूँ। इस लिए कि जब कोरोना और लॉक डाउन का ये समय गुजर जाएगा तो इसे शब्द-दर-शब्द याद रखूँ। चारों तरफ फैले जीवन और भविष्य के डर को और इस से उपजे अवसाद को याद रख सकूँ। शायद ये लिखने में देरी कर दी है लेकिन बाद में शायद इस देरी को समझ पाऊं।  तो आज कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन ( 25 मार्च) को दो महीने से ज्यादा बीत गए है। अभी कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे है इस लिए चौथा लॉक डाउन चल रहा है।  हमारी यूनिवर्सिटी तो उस से भी पहले 16 मार्च को ही बन्द हो गयी थी। देश के अन्य विश्वविद्यालय भी होली (10 मार्च) की छुट्टियों के बाद ही बन्द हो गए थे।          जब लॉक डाउन शुरू हुआ तो लगा छुट्टियाँ पड़ गयी अब मज़े करेंगे। तब तक चूँकि देश मे केस ज्यादा नही थे तो डर भी नही था। लेकिन जैसे जैसे केस बढ़ते गए वैसे वैसे डर भी बढ़ने लगा।  आज जब मैं ये लिख रही हूँ तो पूरी दुनिया में कोरोना के संक्रमित केस 57,04,736 हो गए है और इस में पिछले एक दिन में ही 1,08,220 संक्रमित केस जुड़े है। मरने वालों का आँकड़ा पूरी दुनिया में 3,57,736 में ...

कोरोना के संकट में खराब नेटवर्क और कनेक्टिविटी न होने से ऑनलाइन पढ़ाई की हालत

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हर्षित उतराखंड के गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय से बीएससी कर रहे है| कोरोना के कारण विश्वविद्यालय शुरुआत में 31 मार्च तक के लिए ही बंद हुआ| इस कारण इन कुछ दिनों की छुट्टियों के लिए चमोली जिले में स्थित अपने घर चले गये| कोरोना का संकट बढ़ा तो विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी| लेकिन हर्षित पढ़ नही पा रहा, क्योंकि गाँव में नेटवर्क ही नही आता| किसी दोस्त से विश्वविद्यालय में हुई ऑनलाइन पढ़ाई का हाल पूछने के लिए उसे एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर बाजार आना पड़ता है तब कही जा कर वो जानकारी जुटा पाता है| और जब से ऑनलाइन पढ़ाई हुई है तब से हर शाम बाजार आ कर ये जानकारी जुटाने का काम उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है|   अभिषेक भी हर्षित के साथ ही पहाड़ के एक बड़े शहर श्रीनगर में पढ़ता है| कोरोना से विश्वविद्यालय बंद होने के कारण अभिषेख जोशीमठ (चमोली) ब्लाक स्थित अपने गाँव आ गया| उस से बात होनी भी मुश्किल है| न उसके पास एंड्राइड फोन है और न गाँव में बटन वाले सस्ते फोन पर भी बात करने लायक नेटवर्क आ पाता है|   किसी से कुछ पूछना हो तो वो गाँव के पास धार (पहाड़ में ऊँची जगह) ...