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Showing posts from June, 2020

युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

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युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

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युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

कोरोना में साँस लेने में ही दिक्कत होती है न!

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31 मई 2020-2 कोरोना का संकट चल ही रह है। केस लगातार बढ़ रहे है इसके बावजूद भारत मे कल (30 मई को) सरकार ने लॉक डाउन की शर्तों में कुछ छूट के साथ 30 जून तक लॉक डाउन बढ़ा दिया है। कंटेन्मेंट जॉन ( जहाँ कोरोना के केस ज्यादा है) के अलावा 8 जून से बहुत से क्षेत्रों में छूट देने की बात कह दी है। 8 जून के बाद धार्मिक स्थल और शॉपिंग मॉल खुलने की बात कह गयी है फिलहाल। और शिक्षण संस्थानों के लिए जुलाई में निर्णय की बात की है। ऐसा लग था कि कोरोना के संकट में हम बाकी के भेदभव भूल जाएंगे। जाति, धर्म, रंग, लिंग सब भूल जाएंगे। लेकिन भारत मे हमने देखा कि जब मार्च के बीच में कोरोना के केस बढ़ने शुरू हुए थे तो दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में जमातियों का एक धार्मिक कार्यक्रम में विदेशी जमातियों के कारण संक्रमण फैल गया था। सरकार ने एअरपोर्ट पर जरूरी सावधानियाँ नही बरती और न ही इतनी खबरों के बीच दो-ढाई हजार की भीड़ वाले इस कार्यक्रम को रद्द किया जिस का खामयाजा शुरुआती दिनों में न केवल संक्रमित लोगों को झेलना पड़ा बल्कि मीडिया और सरकार द्वारा जानबूझ कर इसे धार्मिक एंगल दे कर गरीब मुसलमानों को भी इसका असर झेलना प...