युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

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युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

कोरोना वायरस और भारत का असंवेदनशील मिडिल क्लास

अपने देश मे एक मिडिल क्लास है जो हद्द  दर्जे का असंवेदनशील है।

मोदी जी ने 21 दिन का लॉकडाउन किया तो ये अपने घरों में 2-3 महीनों की राशन भर कर वाह वाही करने लगा। किसी ने सवाल किया कि गरीबों का क्या होगा, जिनके पास घर नहीं है उनका क्या होगा, इस आर्थिक तंगी के दौर में बेरोजगार हुए लोगों का क्या होगा,  तो ये एहसान फरामोश मिडिल क्लास उसे गालियों का इनाम देने लगा, मोदी विरोधी कहने लगे और इस संकट में सरकार का साथ देने की नसीहत देने लगा।

इन तश्वीरों को देखिए, इनके पास घर नही है 2 महीने की राशन स्टोर करने के लिए, पैसे नही है खरीदने के लिए, ये पैदल चल रहे है ताकि 2-3 दिन या 4-5 दिन में ही सही अपने घरों तक पहुंच सके, इनकी ये दूरी 200km है तो 300 km  की भी है। लेकिन ये बात न मिडिल क्लास को समझ आएगी और अपर क्लास तो है ही पहले से हद्द दर्जे का एहसान फरामोश।

याद कीजिये ये इसी देश के "हम भारत के लोग है"। इनकी व्यवस्था करना सरकारों की जिम्मेदारी है वही सरकार जिसकी वाहवाही आप कर रहे है। इनको भी अपने लिए सवाल पूछने का उतना ही हक है जितना आपको अपने EMI और Tax के लिये पूछने का।

डॉक्टरों के लिए मास्क और दस्ताने की बात की तो कहने लगे इस समय तो विरोध मत करो। अरे जड़बुद्धि मानुषों पटना के 83 रेजिडेंशियल डॉक्टर इस लिए कोरोना की जद में आ गए क्योंकि वो इस बीमारी से लड़ने के लिए बिना मास्क और दस्ताने लिए युद्ध मैदान में उतर गये थे।इस लड़ाई से सब को मिल कर लड़ना है आप हम सब ने। लेकिन जो लोग लड़ रहे है सीधे उन के पास मिनिमम हथियार तो हो।

तो सवाल पूछना सरकार का विरोध नहीं बल्कि सरकार का उस समस्या पर ध्यान आकर्षित करना है। लगातार सवाल पूछने की वजह से ही पैदल चलने वाले लोगों के लिए उत्तरप्रदेश सरकार ने  बसें चलवाने का फैसला लिया है।

लगातार सवाल पूछिये और घरों में रहिए। सब मिल कर इस लड़ाई से लड़ेंगे तो जीत जाएंगे। सरकार का प्रशासन का सहयोग करें। लेकिन फिर वही अगर सरकार या प्रशासन कुछ गलती करें तो रुक कर सवाल पूछ कर ठीक करना भी हम नागरिकों की ही जिम्मेदारी है।


Comments

  1. मिडिल क्लास की कोई चिंता नहीं करता इसलिए उसका असंवेदनशील होना स्वाभाविक है। राजनैतिक विचारधाराओं में उसका जिक्र नहीं, क्रांति में उसके योगदान की कोई गाथा नहीं, वो ना तो दक्षिणपंथ के पूंजीवादियों की लिस्ट में आता है ना ही वाम के शोषितों में। भारत का मध्यम वर्ग सबसे अधिक उपेक्षित वर्ग रहा है।

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