युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही!

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युद्ध समाधान नही हो सकता कभी भी नही! मेरी एक दोस्त है, ग्रेजुएशन के दिनों की। वो हम सब दोस्तों में सबसे खुशमिजाज लड़की थी। पेपर देने के बाद जहाँ हम सब टेंसन में रहते थे और वो, वो पेपर के बाद हर रोज़ हमें गोपेश्वर (चमोली, उत्तराखंड) के शंग्रीला होटल में छोले समोशे खाने ले जाती थी। जिंदगी से भरपूर। हमारे पास करिअर को लेकर तब एक या दो गोल थे उस के पास 8-10 होते थे। और उसने कैरियर ऑप्शन के लिए BSc PCM करने के साथ ही 12वीं बायोलॉजी से भी डाला था ताकि मेडिकल का ऑप्शन भी उसके पास हो जाय। इसी के चलते एक साल बाद वो देहरादून मेडिकल का कोई कोर्स करने चली गयी। और अगले दो साल में उसकी शादी भी हो गयी।  हमें उस वक्त लगा था ये जल्दी है पर वो खुश थी। शादी जल्दी करने  का कारण पूछा तो उसने कहा लड़का एयर फोर्स में है और बहुत अच्छा है तो कर ली। मेरी उस से मुलाकात नही हुई बहुत समय से, लेकिन फेसबुक पर उसकी सुंदर सुंदर फ़ोटो देख हम सब दोस्त खुश होते थे।      अब अभी 20 दिन पहले उसके पति के ऑन ड्यूटी मृत्यु की खबर एक दोस्त ने बताई।  जैसे ही दोस्त ने ये बात बताई मेरे सामने व...

JNU और छात्रराजनीति

JNU में लेफ्ट यूनिटी ने चारों पदों पर जीत हासिल की है। ये जीत संघर्षों की जीत है। देश में बहुत सारे विश्वविद्यालय है जहाँ चुनाव हुए है तो फिर JNU के लिए पुरे देश में बहस क्यों हो रही है और मैं पोस्ट क्यों लिख रही हूँ? वो इस लिए कि JNU के  छात्रसंघ ने देश के छात्रों-नौजवानों, महिलाओं, किसानों, मजदूरों हर किसी के सवालों पर संघर्ष किया है।
    इस देश में छात्रों को अगर Non-Net fellowship मिल रही है तो वो केवल इस लिए कि JNU के छात्रसंघ ने दिसम्बर की ठण्ड में UGC के बाहर 2 महीने तक दिन- रात  बैठ कर संघर्ष किया। निर्भया कांड के बाद देश में महिलाओं के लिए कठोर कानून और "बेखौफ आज़ादी" की माँग JNU से ही उठी थी और फिर उस आन्दोलन ने देश की गली मुहल्लों तक में विरोध की आवाज को पहुंचा दिया था। देशभर में LGBT समुदाय के लोगों के अधिकारों की माँग हो तो JNU सबसे आगे खड़ा होता है। इस देश में किसानों का विरोध हो या मजदूरों का  उन सब को JNU के ये छात्र आवाज देते है। देश की किसी समस्या पर बात रखनी हो या विदेश की यहाँ का छात्रसंघ हर गाँव, जिले, शहर और देश की आवाज़ को उठाता है।
   JNU देश भर में शिक्षा पर कम हो रहे बजट के खिलाफ खड़ा होता है। और JNU ही विश्वविद्यालयों का निजीकरण करने के खिलाफ खड़ा होता है। JNU जातिवादी और साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ खड़ा होता है। और JNU लोकतंत्र के पक्ष में भी खड़ा होता है वो चाहे इंदिरा गाँधी के आपातकाल के खिलाफ खड़ा होने तक की बात हो या लोकतंत्र के मूल्यों के साथ खड़ा होने की की बात हो JNU इस देश में सरकारों के सामने "विपक्ष" के रूप में खड़ा होता है। और हाँ JNU का मतलब केवल लेफ्ट नही है। JNU सच में लोकतान्त्रिक है जहां प्रत्येक विचारधारा(लेफ्ट/राईट/सेंटर) को जगह मिलती है चाहे उनका वोट 10 या 50 ही क्यों न हो।
     JNU इस देश में उन लोगों के लिए पढ़ाई का रास्ता खोलता है जो JNU न होता तो शायद पढ़ नही पाते। JNU में MA की फीस 283 रूपये है। इतनी कम फ़ीस के बारे में सोचना भी आज के दिन अपराध है। चूड़ी बेचने वाले का लड़का अगर कही से PhD तक की पढ़ाई कर सकता है तो वो केवल JNU है। बिना माँ बाप की बच्ची अगर किसी विश्वविद्यालय में पढ़ कर UPSC कर पा रही है तो वो केवल और केवल JNU में रहकर ऐसा कर पाई। तो JNU सवाल करना सिखाता है, समाज की सोच से हट कर सोचने की बात JNU करता है। अगर इस देश में रात के 2 बजे किसी कैंपस में लड़कियाँ बिना डरे, सहमे घूम सकती है तो वो JNU का कैंपस है। और ये अपने आप नही बना है बल्कि लोगों ने लड़ झगड़ कर बनाया है। जिसे आज खत्म किया जा रहा है। इन जगहों को बचाए जाने की जरूरत है। क्योंकि ये सवाल करने और बहस-मुबाहिसा करने की जगहे बहुत कम दुनिया बची है। JNU बहुत से लोगों का सपना है उस सपने को बचाए जाने की जरूरत है। और JNU खुद को बचाने की लड़ाई लड़ेगा भी और हमेशा की तरह जीतेगा भी।
#JNUlongLive
#student_unity_long_live✊

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